Friday, June 28, 2019
Amma
Saturday, April 29, 2017
जाने दो
विदा की बेला में,
रुकने की बात करके,
फिर से मुझे जांच रहे हो?
बहुत दिन रहे हम साथ,
अब घर जाने दो!
देखो ये आंखें तुम्हारी,
छलकने को हैं,
मेरी राह में कोहरा छा जाएगा,
मैं तो स्वयं ही अवश, शिथिल हो रहीं हूँ....
फिर से मुझे कातर मत बनाओ,
पोंछ लो अपनी आँखें,
मुझे घर जाने दो!
बहुत कुछ कहना था अभी भी,
तुम्हें भी और मुझे भी,
पर अब सबकुछ यहीं पर खत्म करें,
की शेष रह जाए कुछ हिसाब,
तभी तो, हम फिर मिलेंगे!
प्यार से मिल लो एक बार,
और जाने दो,
बहुत दिन रहे हम साथ,
अब घर जाने दो!
मुझे जाने दो!
- अम्मा
हां सच है, कहना तो बहुत कुछ था। तुमसे सुनना भी था। मिलेंगे तो ज़रूर हम कहीं। लेकिन वो एक बार प्यार से ना मिलना, एक बार तुम्हारा हाथ ना पकड़ना, एक बार....आखरी बार...तुम्हारा माथा ना चूमना....हमेशा खलेगा। हमेशा रुलाएगा। क्या सही था और क्या गलत, वो दोराहा तो बहुत पीछे छूट गया। अब सिर्फ तुम्हारी बातें, तुम्हारा प्यार याद है।
जब भी मुझे जाना हो, तो तुम आना और मेरी उंगली थाम के ले जाना। बहुत बातें करेंगे।
Monday, September 19, 2016
जाने से पहले कई सालों में,
एक तरह से तुम थी नहीं,
तो लगता ही नहीं की,
अब तुम हो नहीं,
उन बीते हुए सालों में,
तुम भले साथ थी नहीं,
लेकिन पता था की तुम हो,
तो लगता है की तुम हो, अब भी हो
बहुत कुछ कहा तुमसे और कुछ नहीं कह पाया। कही और अनकही किसी बात का आज मलाल नहीं है। बस आखरी के कुछ दिनों में एक बार हाथ न पकड़ पाने, एक बार 'bye' ना कर पाने का गम हमेशा रहेगा। हमेशा रुलायेगा। लगा नहीं था की तुम चली जाओगी। लगा था की फ़िर मिलेंगे हम। कुछ दिन रही तुम....शायद इंतज़ार किया तुमने। बाकी किसी भी बात का नहीं, क्योंकि हमको पता है की तुम समझी.....लेकिन उस इंतज़ार करवाने के लिए और हाथ ना पकड़ पाने के लिए हम सच में sorry हैं।
कई बार अकेले में तुमको पुकारा है। हो सके तो मिल लेना हमसे। हम तो खोजते हुए आएंगे ही।
Wednesday, June 25, 2014
Wednesday, January 15, 2014
Sunday, December 1, 2013
Thursday, September 19, 2013
तुम चली गयी।
Saturday, September 10, 2011
Old Beggar
Friday, February 2, 2007
Amma
Amma is my grandmother. She has been a guiding force in my life. During my childhood, she used to tell me stories that inculcated high values in me (At least, I would like to believe that they managed to do that!!!!). I have cried on her patriotic and emotional stories but believe me, I have learnt a lot from them too. My childhood has been full of such stories and lessons. 
