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Sunday, July 12, 2026
Let Go
Friday, June 6, 2014
ऐ राही, तू बस अब चलने की तैयारी कर
माना की तुझमें कमियां हैं,
पर जिनको मिला वो कहाँ के सिकंदर थे,
बंदर-बाँट मची है यहां,
तू खड़ा रहा बाहर बस और वो ख़ज़ाने के अंदर थे,
तूने ना भीख मांगी,
ना छीना ना धमकाया,
पर हक़ का मिलेगा यहां,
हुआ सोचना तेरा ज़ाया,
कुछ नियम हैं ज़रूर इस खेल में,
नियम तोड़ सब तख़्त पर चढ़े हैं,
आईने बेच रहा है तू यहां मगर देख,
यहां तो सब अंधे हुए पड़ें हैं,
मिलता तुझे तो कुछ है नहीं,
काम, चिंता और आशाओं के बीच तू जूझता है,
मिलेगा भी कैसे जब,
नियम के पालन के लिए ही सही, तू सवाल बड़े पूछता है,
सवाल पूछने और काम करने वालों को,
कब मिला है अपना हक़,
हां-में-हां मिलाने और पीठ खुजाने से,
सब मिल जाता है यहां बेशक,
बदल कर अपने को रहने को तो यहां,
रह सकता है मगर,
तू ना बदलेगा मालूम है मुझे,
सो ऐ राही, तू बस अब यहां से,
चलने की तैयारी कर
पर जिनको मिला वो कहाँ के सिकंदर थे,
बंदर-बाँट मची है यहां,
तू खड़ा रहा बाहर बस और वो ख़ज़ाने के अंदर थे,
तूने ना भीख मांगी,
ना छीना ना धमकाया,
पर हक़ का मिलेगा यहां,
हुआ सोचना तेरा ज़ाया,
कुछ नियम हैं ज़रूर इस खेल में,
नियम तोड़ सब तख़्त पर चढ़े हैं,
आईने बेच रहा है तू यहां मगर देख,
यहां तो सब अंधे हुए पड़ें हैं,
मिलता तुझे तो कुछ है नहीं,
काम, चिंता और आशाओं के बीच तू जूझता है,
मिलेगा भी कैसे जब,
नियम के पालन के लिए ही सही, तू सवाल बड़े पूछता है,
सवाल पूछने और काम करने वालों को,
कब मिला है अपना हक़,
हां-में-हां मिलाने और पीठ खुजाने से,
सब मिल जाता है यहां बेशक,
बदल कर अपने को रहने को तो यहां,
रह सकता है मगर,
तू ना बदलेगा मालूम है मुझे,
सो ऐ राही, तू बस अब यहां से,
चलने की तैयारी कर
Wednesday, July 17, 2013
Tum Badlogey Yeh Manzar Aisi Aas Hai......
अहमदाबाद में एक ड्राईवर की कही,
वोह बात अभी भी याद है,
उसने जो चाहा था वो,
आज लाखों करोड़ों की फ़रियाद है,
कहा था उसने की वो,
गाँधी से उदास है,
अपने विकास के लिए उसे बस,
नरेन्द्र भाई मोदी पर विश्वास है,
उसकी बात ज़रूर आश्चर्यजनक लगी ,
पर आज का सच दिखाती है,
आज आम आदमी की सोच को,
बखूबी दर्शाती है,
गुजरात के उस बेटे ने,
हमें आजादी दिलाई थी,
आखिर में रास्ता भटकने पर,
अपनों से गोली खायी थी,
गुजरात के इस बेटे ने,
शुरुआत में ज़रूर हो गलत काम किया,
पर अपनी सोच और विकास से,
देश और विश्व में अपना नाम किया,
आज देश के हालात से,
हर कोई शर्मसार और ग़मगीन है,
गरीबी, मेहेंगाई, अव्यवस्था के मारे हर भारतीये की,
हालत बड़ी संगीन है,
कमरतोड़ दी है आम आदमी की मेहेंगाई ने,
व्यापक भ्रष्टाचार ने फैलाया अंधियारा है,
स्वर्णिम भविष्य बनाने के लिए,
नरेन्द्र भाई लगता एक ही सहारा है,
औरों की तो नहीं कह सकता,
मुझे राम मंदिर की परवाह नहीं,
विकास हो, देश का गौरव सम्मान बढे,
बस हो संचालन की दिशा सही,
हालत भले हो खराब मगर,
तुम बदलोगे यह मंज़र ऐसी आस है,
पता नहीं सही है या गलत,
पर नरेन्द्र मोदी पर अटूट विश्वास है,
कहीं टूटा यह विश्वास,
तो हमसे धोखा बहुत बड़ा होगा,
सच बता रहे हैं नरेन्द्र भाई,
हम में से ही कोई, नाथूराम गोडसे बन खड़ा होगा
